ॐ की ध्वनि Om Sound के बारे में जानिए

 जानिए ॐ एक विश्लेषण और ॐ की ध्वनि Om Sound के महत्व के बारे में जानिए

ॐ ध्वनि से मस्तिष्क की कोशिकाओं में कम्पन्न उत्पन्न होता है. जिससे प्रचुर मात्रा में रक्त की आपूर्ति होती है. ॐ की ध्वनि Om Sound मस्तिष्क की कोशिकाओं में रक्त की प्रचुर मात्रा में आपूर्ति होने से कोशिकाएं सक्रिय हो जाती है, जिससे मन की चंचलता कम होकर व्यक्ति या साधक की एकाग्रता बढ़ती है. विचार शांत होते है, मनोविकार टूट होते है. श्वास मंद और लम्बा होता है.


जब हम श्वास नि श्वास करते है उस समय जो आवाज या नाद सुनाई देता है, उसे ॐ कहते है ॐ, ॐ, ॐ दुसरे शब्दों में, जिन व्यंजन ध्वनियों के उच्चारण में प्राणवायु की मात्रा अधिक होती है या श्वास बल अधिक होता है.


ॐ की ध्वनि Om Sound को महाप्राण ध्वनियाँ कहते है.


महान ध्वनियाँ है ॐ मं, न्ह, म्ह आदि, वैसे हिंदी वर्णों में दूसरी और चोथी ध्वनियाँ महाप्राण ध्वनियाँ है, जैसे ख, घ आदि.


ॐ बीजाक्षर है, इसे आघक्षर भी कहते है. हिंदी वर्णमाला में इसकी उत्पत्ति अ से भी पूर्व हुई. ॐ का जन्म नाभिकुंड से होता है. इसके उच्चारण से सूक्ष्म तरंगे उत्पन्न होती है, जिससे प्राणशक्ति विकसित होती है.


ॐ सबसे छोटा मन्त्र है. वेदों की ऋचाये प्राय: इसी मन्त्र से प्रारम्भ होती है. भारतीय प्रार्थनाओं का प्रारम्भ प्राय: ॐ से होता है और समाप्ति भी ॐ से ही होती है. ईसाई प्राथनाए आमेन शब्द से समाप्त होती है. आमेन ओमन शब्द से बना है, यह ओमन शब्द ॐ से व्यत्पन्न हुआ है. ओमन का अर्थ है शांति. यथा ॐ शांति शांति शांति. ओमन भी शंतिसुचक ही है. अरबी भाषा में अमन का अर्थ शांति होता है. अंग्रेजी भाषा का ओमिन शब्द भी ॐ से बना है.


ॐ का एक अर्थ है सम्पूर्ण विश्व सर्वव्योमन व्योमन अर्थात विश्व सम्पूर्ण आकाश



ॐ का एक अन्य अर्थ है हाँ. यह विधायक शब्द है. यह व्यक्ति की उपस्थिति का भी घोतक है.



ॐ ब्रम्हा, परमात्मा, अल्लाह, गॉड, ईश्वर का प्रतीक है.


ॐ में ब्रम्हा, विष्णु, महेश, त्रिदेव समाविष्ट है.


ॐ में अरहंत, अशरीरी (सिद्ध आचार्य, उपाध्याय और मुनि) साधू ये पांचो परमेष्ठी व्याप्त है


ॐ में सगुण और निर्गुण दोनों की व्याप्ति मानी गई है.


ॐ जगत का आधार है. यह ओंकार रूप है.


ॐ में देव शास्त्र और गुरु तीनों विद्यमान है.


ॐ में त्रिरत्न सम्यक दर्शन सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र का समाहार है.


ॐ की ध्वनि ही ऐसी है, जो सम्पूर्ण ब्रम्हांड में व्याप्त होने की क्षमता रखती है.


वैज्ञानिक भाषा में ॐ की ध्वनी मस्तिष्क की कोशिकाओं की सफाई के लिए वेक्यूम क्लीनर का काम करती है. यह वेक्यूम कमरे की सफाई के काम आता है.


ॐ ध्वनि से मस्तिष्क की कोशिकाओं में कम्पन उत्पन्न होता है. जिससे प्रचुर मात्रा में रक्त की आपूर्ति होती है. मस्तिष्क की कोशिकाओं में रक्त की प्रचुर मात्रा में आपूर्ति होसे से कोशिकाए सक्रिय हो जाती है, जिससे मन की चंचलता कम होकर व्यक्ति या साधक की एकाग्रता बढती है.


विचार शांत होते है. मनोविकार दूर होते है. श्वास मंद और लम्बा होता है. स्मरण शक्ति बढती है. भावधारा मिर्मल स्वर मधुर, उच्चारण स्पष्ट और कल्पनाशक्ति में वृद्धि होती है. गुंजित तरंगे प्रकाश पुंज का निर्माण कर रक्षा कवच बनाती है.

ॐ की ध्वनि का उच्चारण ३ ९ २१ बार तक किया जा सकता है.


ॐ की ध्वनि के उच्चारण में बीस सेकंड की समयाविधि निर्धारित की गई है. इसमें श्वास लेने में छह सेकंड, श्वास छोड़ने में बारह सेकंड और तदनन्तर दो सेकंड का समय गुंज का अनुभव करने के लिए निर्धारित रहता है.


अंत में कुछ समय के लिए व्यक्ति को मौन या निशब्द रहना चाहिए.

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